सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज: राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ऐतिहासिक वंदे मातरम् गीत का सामूहिक गायन कार्यक्रम का भव्य आयोजन

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सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल रानीपुर, हरिद्वार में शुक्रवार को “नमामि भारतम्—एक समय, एक लय, एक स्वर, वंदे मातरम्” के पावन संकल्प के साथ वंदे मातरम् सामूहिक गायन कार्यक्रम का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 3930 लोगों ने सहभागिता की। इनमें 2773 छात्र-छात्राएं, 981 अभिभावक, 161 शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं 15 अतिथिगण शामिल रहे। हजारों लोगों द्वारा एक साथ वंदे मातरम् का गायन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं और अभिभावकों ने भी एक साथ खड़े होकर राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। इस दौरान पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से ओत-प्रोत हो गया।

प्रातः 10:30 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमहंत रविंद्र पुरी जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद; रजनीकांत शुक्ल जी, मंत्री भारतीय शिक्षा समिति, उत्तराखंड, राकेश जी, विभाग प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हरिद्वार विभाग, संजय पवार, पूर्व जीएम (भेल), तथा अनुज सिंह (पार्षद) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ किया गया। सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य कमल सिंह रावत जी ने अतिथियों का परिचय कराया।

इसके बाद रजनीकांत शुक्ल जी, मंत्री भारतीय शिक्षा समिति, उत्तराखंड ने वंदे मातरम् की प्रस्तावना रखते हुए राष्ट्रगीत के 150 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय चेतना का ऐसा उद्घोष है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में देशवासियों के भीतर राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की भावना को जागृत किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में आयोजित हो रहे कार्यक्रम हमारी युवा पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि आज हजारों बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों का एक साथ वंदे मातरम् गाना केवल सामूहिक गायन नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति एकजुटता और सम्मान की सामूहिक अभिव्यक्ति है। इस अवसर पर कमलेश जी ने एकल गीत प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। इसके बाद राकेश जी, विभाग प्रचारक, हरिद्वार ने अतिथि उद्बोधन में कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण की भावना है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेम हमारे व्यवहार और कर्तव्यों में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन में अनुशासन, संस्कार, परिश्रम और राष्ट्रभावना को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रद्धेय श्रीमहंत रविंद्र पुरी जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अध्यक्षीय आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि “आज जब हजारों बच्चे, अभिभावक और शिक्षक एक साथ खड़े होकर वंदे मातरम् का गायन कर रहे हैं, तो यह भारत की एकता और राष्ट्रभावना का अद्भुत दृश्य है। यही वह संस्कार है, जो आने वाली पीढ़ी को अपने राष्ट्र और संस्कृति से जोड़ता है।” उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रभक्ति की भावना से है। विद्यालयों में ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उन्हें अपनी मातृभूमि, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से देश की उन्नति में अपनी भूमिका निभाने और राष्ट्रहित को सदैव सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के सत्यापन अधिकारी संजय पवार, पूर्व जीएम, भेल रहे। उन्होंने पूरे कार्यक्रम की सहभागिता एवं आयोजन का सत्यापन किया। ठीक प्रातः 11:00 बजे ऐतिहासिक क्षण आया, जब विद्यालय के 2773 छात्र-छात्राओं, 161 शिक्षक-शिक्षिकाओं, 981 अभिभावकों एवं 15 अतिथियों सहित कुल 3930 लोगों ने “एक समय, एक लय, एक स्वर” में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया। हजारों कंठों से एक साथ निकले वंदे मातरम् के स्वर से पूरा विद्यालय परिसर गूंज उठा। वातावरण में राष्ट्रभक्ति और देशप्रेम की अद्भुत अनुभूति दिखाई दी। कार्यक्रम के अंत में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लोकेंद्र अंथवाल जी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, एकता और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करते हैं।

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