कमान्द (टिहरी गढ़वाल), 30 अप्रैल 2026: राजकीय महाविद्यालय कमान्द, टिहरी गढ़वाल में आज मानसिक कल्याण क्लब, महिला सेल एवं रेड क्रॉस इकाई के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं हेतु विभिन्न महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर गौरी सेवक ने प्रथम सत्र का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और धैर्य का परीक्षण है। प्राचार्य जी ने विशेष रूप से ‘सेल्फ हीलिंग’, ‘इनर हीलिंग’ तथा ‘इनबॉक्स हीलिंग’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि जिस प्रकार हम अपने मोबाइल का इनबॉक्स साफ़ करते हैं, उसी प्रकार हमें अपने मस्तिष्क से अनावश्यक नकारात्मक विचारों और सूचनाओं के बोझ को हटाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना चाहिए। उन्होंने एकाग्रता बढ़ाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम तथा उद्गीथ प्राणायाम के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित अभ्यास से विद्यार्थी अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत कर सकते हैं और परीक्षा के समय होने वाली घबराहट पर पूर्ण विजय प्राप्त कर सकते हैं।
इसी क्रम में, महाविद्यालय के योग प्रशिक्षक श्री देवेश चंद्र द्वारा विद्यार्थियों को परीक्षा काल के तनाव से मुक्त रखने हेतु भ्रामरी और त्राटक जैसी क्रियाओं का प्रयोगात्मक अभ्यास कराया गया। उन्होंने बताया कि योग की ये सूक्ष्म क्रियाएं न केवल मस्तिष्क की नसों को शांत करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति (Memory) और बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने में भी रामबाण सिद्ध होती हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे योग को केवल कार्यशाला तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि वे दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकें।
द्वितीय सत्र में, महिला सेल की प्रभारी डॉ. शेफाली शुक्ला ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय का महिला सेल छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने छात्राओं के लिए ‘मेंटल टफनेस’ और भावनात्मक मजबूती विकसित करने पर जोर दिया और उन्हें आत्म-देखभाल (Self-care) तथा संतुलित जीवनशैली अपनाने के गुर सिखाए। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में छात्राओं का मानसिक रूप से सुदृढ़ होना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. शुक्ला ने आह्वान किया कि छात्राएं अपनी अंतर्निहित क्षमताओं को पहचानें और किसी भी प्रकार के दबाव में आने के बजाय आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करें।
तत्पश्चात, रेड क्रॉस इकाई की प्रभारी डॉ. नीना शर्मा ने विद्यार्थियों को मानवता और सेवा के सिद्धांतों से जोड़ते हुए स्वस्थ जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज सेवा और परोपकार से मिलने वाला मानसिक संतोष तनाव प्रबंधन का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य प्रोफेसर गौरी सेवक ने तीनों सत्रों की समीक्षा करते हुए इसे राजकीय महाविद्यालय कमान्द के विद्यार्थियों के विकास हेतु ‘मील का पत्थर’ बताया। अंत में प्राचार्य महोदय, समस्त प्राध्यापक गण एवं विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक रूप से ‘लाफ्टर थेरेपी’ (Laughter Therapy) का अभ्यास कर सकारात्मक ऊर्जा के साथ सत्र का समापन किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के डॉ. राकेश मोहन नौटियाल, डॉ. दीपक राणा एवं श्री केदारनाथ भट्ट सहित समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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