ब्लाइंड मर्डर केस- कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद हरिद्वार पुलिस ने किया अज्ञात महिला हत्याकांड का खुलासा

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हरिद्वार:  दिनांक 10.05.2025 को चण्ड़ी देवी मन्दिर के रोपवे के पास टूटे हुए पैदल रास्ते पर एक अज्ञात महिला का शव बिना कपडों के पड़े होने की सूचना पर श्यामपुर पुलिस मौके पर पहुँची। वन विभाग द्वारा पैदल यात्रा के लिए वर्जित उक्त रास्ते पर करीब 10 मीटर अन्दर घनी झाडियों के मध्य एक महिला का शव पडा हुआ मिला।

फोरेंसिक टीम और पुलिस उच्चाधिकारियों ने मौका मुआयना कर घटनास्थल व आसपास मौजूद साक्ष्य (दो कुँडल, एक टूटा हुआ मंगलसूत्र, एक सफेद रंग का गमछा व महिला के गले से एक ब्लाउज जो कि गले को कस कर बांधा हुआ था) बरामद किया। घटना स्थल के आसपास मौजूद कीडे मकोडों की वजह से महिला का शव का चैहरा पूरी तरह सड चुका था जिस कारण पहचान करीब करीब असंभव सी लग रही थी़।

एसएसपी नवनीत सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद थाना श्यामपुर में टीम का गठन कर टेक्निकल सपोर्ट की जिम्मेदारी सीआईयू हरिद्वार को देते हुए पूरे प्रकरण के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी एसपी क्राइम निशा यादव को सौंपी। टीम को दो टास्क दिए गए जिसमें पहला टास्क था मृतक महिला की पहचान उजागर करना और दूसरा टास्क था इस हत्याकांड की पूरी पटकथा को सामने लाकर कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाना।

चैहरा सड़ा गला होने की वजह से पहचान करने में पेश आ रही दिक्कतों के बीच पुलिस टीम को मृतका के दाहिने हाथ पर अंग्रेजी में KAUSHILYA व एक गमला(Flower pot) व बाये हाथ पर दिल के आकार में अग्रेजी के केपिटल अक्षरों में K.R, व दिल के बाहर अलग से R गुदा हुआ मिला। मृतका के बाये हाथ के हथेली के पीछले हिस्से पर ॐ का निशान भी बना हुआ था।

विभिन्न प्रकार के टेक्निकल माध्यम से डीसीआरबी , एससीआरबी व एनसीआरबी को प्रेषित किया गया लेकिन शुरुआती 72 घण्टे तक पहचान न हो पाने पर शव का दाह संस्कार कर चौकी चण्डीघाट प्रभारी उ0नि0 सन्तोष सेमवाल की ओर से थाना श्यामपपुर पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा 57/26 धारा- 103(1) बी0एऩ0एस0पंजीकृत किया गया।

पहले टास्क के तौर पर महिला की पहचान पता करने में जुटी टीम को यहां एक और समस्या का सामना करना पड़ा। आंधी तूफान की वजह से क्षतिग्रस्त होने के कारण घटनास्थल के आसपास मौजूद सीसीटीवी कैमरो से वारदात की संभावित तिथि की किसी तरह का कोई लाभप्रद सूचना मही मिल पा रही थी।

टीम ने घटनास्थल के 05 किमी के परिधि के समस्त कैमरो की एक मई से दस मई तक की बैक अप फुटेज का विष्लेषण करने के साथ ही संदिग्ध वाहनो को फारवर्ड/बेकवर्ड ट्रेस, घटनास्थल के आसापास बस्तियों/होटल/धर्मशाला/होमस्टे में सत्यापन करते हुए विभिन्न पोर्टल्स पर कौशल्या नाम की महिला की गुमशुदगी के बारे में जानकारी की गयी तो उपरोक्त माध्यमों से सन 2019से अब तक कुल 164 कौशल्या नामक महिलाओं की गुमशुदगी की जानकारी प्राप्त हुयी।

कुल 3540 कौशल्या नाम की महिलाएं/युवतियां निर्वाचन कार्यालयों में रजिस्टर्ड थी। इसके अतिरिक्त जनपद की सोशल मीडिया monitoring टीम द्वारा सोशल मीडिया साइट पर कौशल्या नाम की महिला की मिसिंग या अन्य सूचना पर लगातार निगरानी की जा रही थीl

SIR प्रक्रिया के माध्यम से सभी का डाटा इकट्ठा कर सम्बन्धित थानो/ सरहदीय जनपदों में सम्पर्क करने के साथ ही लगभग 144 घण्टों का डम्प डाटा से मिले लगभग 1,64,605 नम्बरों में अंकित नामों की ट्रू कॉलर एप्प के जरीए शिनाख्त की गई।

जांच के दौरान दिनांक-08.05.2026 की सीमित फुटेज में रात के वक्त 03 संदिग्ध व्यक्ति व एक महिला को चण्डी देवी मन्दिर की तरफ जाते देखा गया। लौटते वक्त संदिग्ध के साथ महिला मौजूद नही थी। रुट चार्ट, संदिग्ध नम्बरों का बारिकी से निरीक्षण करने पर टीम के हाथ बड़ी सफलता लगी जब बांदा उत्तर प्रदेश के तीन संदिग्ध क्रमशः राकेश, रामप्रकाश उर्फ गोविन्दा और छेदीलाल के नाम प्रकाश में आये।

अब तक जुटाए गए सबूतों/बयानों के आधार पर स्पष्ट हुआ कि तीनों संदिग्ध ने आपराधिक षडयंत्र रचकर मृतका कौशिल्या पत्नी पप्पू निवासी बांदा उत्तर प्रदेश की गला घोट कर हत्या की है। मुकदमे में धारा- 61(2) बी0एन0एस0 कर तीनों को पुलिस हिरासत में लिया गया। पूछताछ में जानकारी मिली कि हत्यारोपी रामप्रकाश की मृतका कौशल्या से प्रेम संबंध थे।

पहले से शादीशुदा होने के बाद भी मृतका द्वारा रामप्रकाश पर शादी करने के लिए दबाव बनाया गया। इस दबाव से तंग आकर रामप्रकाश ने अपने भाई राकेश और सगे जीजा छेदीलाल के साथ मिलकर कौशल्या को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।

हत्या को अंजाम देने के लिए चंडी देवी दर्शन के बहाने हत्यारोपियों ने जानबूझकर घर से इतनी दूर हरिद्वार को इसलिए चुना ताकी मृतका की पहचान ही न हो पाए लेकिन हरिद्वार पुलिस ने अपनी मेहनत और विशेषज्ञता का नमूना पेश करते हुए उनकी योजना विफल कर तीनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया।

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