धनौरी, हरिद्वार- धनौरी पीजी कॉलेज में शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास और शिक्षण गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आंतरिक “फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम” (FDP) के अंतर्गत एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिनांक 03 सितंबर, 2026 को दोपहर 02:30 बजे महाविद्यालय के मुख्य सभागार के कॉन्फ्रेंस हॉल में संपन्न हुआ, जिसमें कॉलेज के समस्त सहायक आचार्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शिक्षा शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अलका सैनी का मुख्य व्याख्यान रहा। उन्होंने “भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्य-आधारित शिक्षा” (Indian Knowledge System and Value-Based Education) विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं और नैतिक मूल्यों को समाहित करना क्यों आवश्यक है, ताकि छात्र अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक भी बन सकें।
व्याख्यान के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों पर गहन चर्चा की गई, जिसमें कृषि, पारिस्थितिकीय तंत्र (इकोलॉजी), भाषा, कला और नैतिकता को भी विशेष रूप से जोड़ा गया।
वक्ता ने बताया कि हमारी प्राचीन परंपराओं में कृषि और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की गहरी समझ थी, जो आज के पारिस्थितिकीय संकट से निपटने में मार्गदर्शक बन सकती है। इसके साथ ही, देश की समृद्ध भाषाओं, पारंपरिक कलाओं और मानवीय नैतिकता को आधुनिक शिक्षा का आधार बनाकर विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। शिक्षकों ने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि कैसे कक्षाओं में मूल्य-आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया जा सकता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ) विजय कुमार एवं अन्य प्राध्यापकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक बदलावों के साथ खुद को अपडेट रखने और शिक्षण के उच्च मानकों को बनाए रखने में मदद करते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित सहायक आचार्यों ने इस ज्ञानवर्धक सत्र में सक्रिय सहभागिता निभाई और सत्र को अत्यंत उपयोगी बताया।

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