राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अगस्त्यमुनि में देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत तीन दिवसीय आवासीय बूट कैंप का आयोजन

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अगस्त्यमुनि में देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों में उद्यमशीलता, नवाचार एवं स्वरोजगार की भावना विकसित करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय आवासीय बूट कैंप दिनांक 01 जुलाई से 03 जुलाई 2026 में सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रुद्रप्रयाग एवं चमोली जिलों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अपने उद्घाटन संबोधन में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ सुधीर पेटवाल ने विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजनकर्ता बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उद्यमिता आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सशक्त आधार है।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सुखपाल सिंह रौतेला ने देवभूमि उद्यमिता योजना के उद्देश्यों एवं विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं को नवाचार, कौशल विकास और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का उत्कृष्ट मंच प्रदान करती है तथा विद्यार्थियों को अपने विचारों को सफल उद्यम में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित करती है। महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ अखिलेश्वर कुमार द्विवेदी ने छात्रों को रोजगार के लाभों के बारे में विस्तृत चर्चा की।

विषय विशेषज्ञ डॉ. रजत ने स्टार्टअप की अवधारणा, बिजनेस मॉडल, नवाचार, नेतृत्व क्षमता तथा उद्यम स्थापित करने की विभिन्न प्रक्रियाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को चुनौतियों को अवसर में बदलने तथा आत्मविश्वास एवं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।श्री विनोद नेगी ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि, पर्यटन, जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प एवं डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएँ हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नवाचार आधारित उद्यम विकसित करने का आह्वान किया। श्री दिग्विजय जी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि आज का युवा यदि अपने ज्ञान, कौशल और नवीन सोच को सही दिशा प्रदान करे तो वह केवल स्वयं आत्मनिर्भर नहीं बन सकता, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से जोखिम उठाने की सकारात्मक सोच विकसित करने, निरंतर सीखते रहने तथा अपने स्टार्टअप विचारों को व्यवहारिक रूप देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सफलता का मूल मंत्र दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, निरंतर प्रयास और नवाचार है। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र, समूह चर्चा तथा बिजनेस आइडिया प्रस्तुतीकरण का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उनके विचारों को व्यवहारिक रूप देने हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर कैलाश चंद्र दुदपुडी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उद्यमिता केवल स्वरोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण एवं आर्थिक विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा, ज्ञान एवं नवाचारी सोच का उपयोग करते हुए आत्मनिर्भर बनने तथा रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उद्यमिता योजना युवाओं के सपनों को साकार करने का एक प्रभावी मंच है और विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ उठाकर अपने अभिनव विचारों को सफल उद्यम में परिवर्तित करने का प्रयास करना चाहिए।

अंत में प्राचार्य प्रोफेसर कैलाश चंद्र दुदपुडी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए नोडल अधिकारी डॉ. सुखपाल सिंह रौतेला, विषय विशेषज्ञ डॉ. रजत, श्री विनोद नेगी, श्री दिग्विजय जी तथा आयोजन में सहयोग देने वाले सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं की सराहना करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस बूट कैम्प को पूर्ण रुप से सफ़ल बनाने में महाविद्यालय के देवभूमि उद्यमिता के पूर्व नोडल अधिकारी डॉ विष्णु कुमार शर्मा जी का भी पूर्ण सहयोग एवं योगदान मिला l

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