धनौरी पी.जी. कॉलेज के छात्र-छात्राओं का झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन

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धनौरी पी.जी. कॉलेज, धनौरी के जन्तु विज्ञान विभाग द्वारा दिनांक 16 अप्रैल 2026 को बी.एस.सी. 6th सेमेस्टर, एम.एस.सी. द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व (राजाजी नेशनल पार्क) में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

इस शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को झिलमिल झील संरक्षण क्षेत्र के पर्यावरण, वनस्पति (Flora) एवं जीव-जंतुओं (Fauna) के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था। भ्रमण के दौरान नेचुरलिस्ट श्री सतेन्द्र सैनी द्वारा जैव विविधता (Biodiversity) एवं क्षेत्र में पाए जाने वाले हिरणों की विभिन्न प्रजातियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया।
भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा झिलमिल संरक्षण रिजर्व क्षेत्र का प्रत्यक्ष सर्वेक्षण (Field Survey) एवं अवलोकन (Observation) किया गया। छात्रों ने आर्द्रभूमि (Wetland), घासभूमि (Grassland) एवं वन क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र का गहन अध्ययन करते हुए जल स्तर, वनस्पति वितरण, जीव-जंतुओं की उपस्थिति तथा उनके प्राकृतिक आवास का स्थल पर निरीक्षण किया। इस प्रत्यक्ष अध्ययन से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने जंगल सफारी का अनुभव प्राप्त किया, जिससे उन्हें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को निकट से समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने पक्षियों, हिरणों एवं अन्य वन्यजीवों के व्यवहार तथा उनके पर्यावरणीय अनुकूलन का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रियंका नेगी (सहायक आचार्य, जन्तु विज्ञान) एवं डॉ. नीतू रानी (सहायक आचार्य, जन्तु विज्ञान) द्वारा विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया गया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) की आवश्यकता एवं वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय कुमार ने इस शैक्षणिक भ्रमण एवं विद्यार्थियों द्वारा किए गए क्षेत्रीय सर्वेक्षण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फील्ड सर्वे विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि “प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से ही विद्यार्थी विषय की वास्तविक समझ विकसित कर पाते हैं तथा प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनते हैं।” साथ ही उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण एवं सर्वेक्षण कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन पर बल दिया।
यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

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