राजकीय महाविद्यालय मंगलौर हरिद्वार के “हिंदी विभाग” के तत्वाधान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय “डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष और आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका: शिक्षा के विशेष संदर्भ में”।

सर्वप्रथम छात्र-छात्राओं को डॉ. अंबेडकर के जीवन-संघर्ष से संबंधित पोस्टर प्रदर्शनी दिखाई गयी। तत्पश्चात विद्यार्थियों के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बड़े उत्साह और गंभीरता के साथ भाग लिया। प्रतियोगिता में हिंदी भाषा, साहित्य तथा सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे गए, जिनके उत्तर प्रतिभागियों ने OMR शीट पर अंकित किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के “प्राचार्य डॉ. तीर्थ प्रकाश” ने छात्र-छात्राओं को कहा कि, अंबेडकर के विचारों को हमें आगे बढ़ाना होगा, उनके विचार आज भी प्रासंगिक है। वह किसी खास वर्ग के नहीं है उन्होंने सर्व-समाज और महिलाओं के अधिकारों की बात की।

प्रतियोगिता के उपरांत “हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राम भरोसे” ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि, डॉ. अंबेडकर ने हमेशा मानवता की बात की। कोलम्बिया यूनिवर्सिटी और अन्य देशों में उनकी मूर्तियां लगी है, लेकिन जिस देश में उनका जन्म हुआ उस देश में उनकी मूर्तियों को तोड़ा जाता है। किसी एक जाति, धर्म का विकास संपूर्ण देश का विकास नहीं होगा।

इसके पश्चात *“अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन से नईम”* ने अपने उद्बोधन में कहा कि, हॉल के बाहर जो पोस्टर प्रदर्शनी के विषय छात्रों से पूछा। राज्य सभा टीवी द्वारा संविधान को बनाते समय क्या-क्या डिबेट हुई, से संबंधित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। डॉ. अंबेडकर के जीवन और संघर्ष से संबंधित प्रश्नोत्तरी के प्रश्न पूछे गए, जिन छात्र-छात्राओं ने जवाब दिया उन्हें पेन और किताब देकर पुरस्कृत किया गया।

मुख्य वक्ता प्रो० सुशील उपाध्याय ने अपने वक्तव्य मे भगवान बुद्ध के जीवन के बारे बताते हुए कहा कि उनका जीवन केवल आध्यात्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि सत्य की खोज का एक महान उदाहरण है। बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने से पहले अनेक गुरुओं के पास जाकर शिक्षा ली- जिनमें संजय भट्ट विश्वमित्र जैसे गुरु शामिल थे। उन्होंने अपने जीवन में कई गुरुओं को बदला, क्योंकि वे केवल परंपरागत ज्ञान से संतुष्ट नहीं थे, बल्कि अंतिम सत्य की खोज करना चाहते थे।
उन्होंने स्वयं अनुभव के आधार पर यह समझा कि सच्चा मार्ग भीतर से ही निकलता है, इसलिए उन्होंने कहा ”अप्प दीपो भव:” अर्थात् स्वयं अपने दीपक बनो। बुद्ध वंदना से उन्होंने जीवन के चार महान सत्य बताए-
दुःख है
दुःख का कारण है
दुःख का निवारण संभव है
दुःख निवारण का मार्ग है- अष्टांगिक मार्ग…
इसी प्रकार डॉ. साहब भीमराव अंबेडकर ने भी अपने जीवन के उस दौर में जब पूरी दुनिया उन्हें जानती थी, यह सिद्ध किया कि वे केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि अपने समय के एक महान अर्थशास्त्री राजनीतिज्ञ भी थे। उन्होंने मजदूरों और श्रमिकों के अधिकारों पर गहराई से विचार किया और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए।

उन्होंने बताया कि किसी भी समाज की प्रगति उसके श्रमिक वर्ग के सम्मान और अधिकारों पर निर्भर करती है। इसलिए उन्होंने श्रम को केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत हिन्दू कोड बिल महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। यदि उस समय महिलाओं को पूर्ण रूप से ये अधिकार और स्वतंत्रता मिल जाती, तो आज समाज में उनकी स्थिति कहीं अधिक सशक्त और सम्मानजनक होती। तत्पश्चात उन्होंने बाबा साहेब के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तकों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हम वास्तव में डॉ. भीमराव अम्बेडकर को जानना चाहते हैं, तो केवल सुनने से नहीं, बल्कि उनके विचारों को पढ़कर समझना होगा।

सभी प्रतिभागियों की सहभागिता की सराहना की गई और सफलतापूर्वक प्रतियोगिता के संपन्न होने पर आयोजन समिति को बधाई दी गई। यह एक दिवसीय संगोष्ठी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई।

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य महोदय ने कहा कि हमें डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन और विचारों को गहराई से जानना चाहिए तत्पश्चात उपस्थित अतिथिगण एवं सभी छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया गया। महाविद्यालय परिवार से डॉ० अनुराग, डॉ० निविन्ध्या, डॉ० कलिका, डॉ० दीपा, डॉ० रचना, श्रीमती गीता, श्रीमती शर्मिष्ठा, कु० निर्जेश, श्री फ़ैज़ान, श्री सूर्या, श्री रोहित, श्री जगपाल, श्री सन्नी कार्यक्रम में उपस्थित रहें।


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