स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने उत्तराखंड के चारधाम सहित देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में कथित भ्रष्टाचार और दान की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

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हरिद्वार-  शांभवी पीठाधीश्वर एवं काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने उत्तराखंड के चारधाम सहित देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में कथित भ्रष्टाचार और दान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं के दान का दुरुपयोग हो रहा है और इसकी सच्चाई देश के सामने लाने के लिए व्यापक मुहिम चलाई जाएगी।

हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि इन मंदिरों में केवल वेतन व्यवस्था और लूट का माहौल बन गया है, इसलिए सरकारी मंदिरों में दान देने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों का संचालन ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य के नेतृत्व में किया जाए, क्योंकि मठों में रहने वाले संन्यासियों का धार्मिक स्थलों से आत्मिक जुड़ाव होता है, जबकि सरकारी तंत्र में ऐसी भावना नहीं होती।

स्वामी आनंद स्वरूप ने अयोध्या के राम मंदिर के दानपात्र से नगदी और जेवरात चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समस्या केवल राम मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि केदारनाथ, बदरीनाथ सहित कई प्रमुख मंदिरों में ऐसी घटनाओं की चर्चा होती रही है। उन्होंने दावा किया कि लगातार सामने आ रहे मामलों से श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित हुआ है और लोग दान देने से बचने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की धार्मिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर प्रकरण में ट्रस्ट के पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी से जुड़े घटनाक्रम पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका आरोप था कि एसआईटी का गठन केवल छोटे लोगों को पकड़ने और बड़े लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने मांग की कि भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर सत्ता और संस्थाओं में बैठे जिम्मेदार लोगों को नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, तभी देश में जवाबदेही की स्वस्थ परंपरा स्थापित होगी।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने बिहार के भोजपुर जिले के बिलौठी गांव निवासी भरत तिवारी का उल्लेख करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनके नाम पर देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी ने सामाजिक अव्यवस्था, सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा गरीबों और मेहनतकश लोगों की आवाज उठाई, जिसके कारण उनकी हत्या करवा दी गई।

उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब देश में अन्याय और अत्याचार बढ़ा है, तब-तब युवाओं ने आगे बढ़कर उसका विरोध किया है। उन्होंने भरत तिवारी की तुलना स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों से करते हुए कहा कि आज का युवा भी भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने के लिए तैयार है।

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