आज सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल रानीपुर, हरिद्वार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। विद्यालय परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति एवं उनके दिव्य चरित्र की सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष एवं भक्ति भाव से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम में विद्यालय के भैया-बहनों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं लीलाओं पर आधारित धार्मिक नृत्य, भक्ति गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियांbदेकर सभी का मन मोह लिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी बाल लीलाओं, गोप-गोपियों के प्रति प्रेम तथा धर्म एवं सत्य की स्थापना के संदेश की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।
कार्यक्रम में विद्यालय की आचार्या श्रीमती लीना शर्मा जी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म के मार्ग पर चलने, सत्य का साथ देने, कर्तव्य का पालन करने तथा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप एवं उनकी विभिन्न लीलाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने मधुर एवं भावपूर्ण भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त अन्थवाल ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े अनेक रोचक एवं प्रेरणादायी प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण केवल एक धार्मिक एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ मित्र, कुशल मार्गदर्शक, महान कर्मयोगी और धर्म के रक्षक भी थे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से मानव जीवन को कर्म, कर्तव्य और धर्म का महान संदेश दिया।
प्रधानाचार्य जी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेम, मित्रता, विनम्रता, साहस, अनुशासन और सत्य के प्रति निष्ठा जैसे गुणों को अपने जीवन में अपनाएं।
उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि माखन चोरी की लीला में भी वात्सल्य और आनंद का भाव है, गोवर्धन पूजा में प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश है और महाभारत में अर्जुन को दिया गया गीता का उपदेश कर्म एवं कर्तव्य की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रधानाचार्य ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारवान, चरित्रवान, अनुशासित एवं राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाना भी है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों एवं धार्मिक नृत्यों ने सभी को भावविभोर कर दिया। भैया-बहनों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘धर्म की रक्षा, सत्य का पालन और कर्म करते रहने’ का संदेश दिया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विद्यालय परिसर का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक एवं भक्तिमय दिखाई दिया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के प्रति श्रद्धा एवं गौरव की भावना को और मजबूत किया।
अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त अन्थवाल ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा एवं उनके आदर्शों का प्रकाश सभी के जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ाए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

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