कमांद, 12 अक्टूबर 2026। राजकीय महाविद्यालय कमांद में प्राचार्या प्रोफेसर गौरी सेवक के दिशा-निर्देशन में तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रभारी डॉ. बीना रानी के नेतृत्व में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘विकसित भारत 2047’ की संकल्पना पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके साथ ही आंगनवाड़ी पोषण माह के उद्देश्यों के अनुरूप पोषण जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली तथा सुपोषित समाज के महत्त्व से अवगत कराया गया।
चित्रकला प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनमें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं विकासपरक दृष्टिकोण विकसित करना था। विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से विकसित भारत की परिकल्पना, देश की प्रगति, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा उत्तराखंड के समग्र विकास से संबंधित विचारों को प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की अवधारणा को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आंगनवाड़ी पोषण माह की भावना के अनुरूप पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पर विशेष बल दिया गया। छात्र-छात्राओं को संतुलित आहार, पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन, स्थानीय अनाजों के पोषण मूल्य तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्त्व के विषय में जानकारी दी गई। साथ ही, सुपोषण को स्वस्थ परिवार, सशक्त समाज और समग्र राष्ट्रीय विकास का आधार बताते हुए दैनिक जीवन में पौष्टिक एवं संतुलित भोजन को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया।
उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय में इससे पूर्व 7 अक्टूबर 2026 को गढ़भोज दिवस के अवसर पर भी पोषण माह की मूल भावना के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस अवसर पर उत्तराखंड की समृद्ध पारंपरिक खाद्य संस्कृति, स्थानीय अनाजों एवं क्षेत्रीय व्यंजनों को विशेष महत्त्व दिया गया। पारंपरिक भोजन की पौष्टिकता को रेखांकित करते हुए स्थानीय खाद्य पदार्थों के संरक्षण, संवर्धन एवं उपयोग को प्रोत्साहित किया गया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूक करना था।
गढ़भोज दिवस तथा पोषण माह के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय खाद्य परंपराओं को स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना आर्थिक एवं तकनीकी प्रगति के साथ-साथ स्वस्थ, जागरूक, शिक्षित और उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण से भी जुड़ी है। इस दिशा में युवाओं की सक्रिय सहभागिता, सामाजिक चेतना, पोषण जागरूकता तथा स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर डॉ. शेफाली शुक्ला, डॉ. राकेश मोहन नौटियाल, डॉ. दीपक राणा, श्री देवेश चंद्र आदि प्राध्यापकगण सहित श्री केदारनाथ भट्ट, श्री सोहन सिंह, श्री सत्येंद्र डोभाल, श्रीमती प्रभा देवी, श्री संजय बधानी एवं श्री अंकित आदि उपस्थित रहे।

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