महापुरुषों की जयन्ती पर पुष्प ही न चढ़ाएं, बल्कि उनके आदर्शों को भी जीवन में धारण करें– जितेन्द्र रघुवंशी

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हरिद्वार 2 अक्टूबर। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के कर्णधार द्वय महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर शहीद जगदीश वत्स पार्क निकट जटवाड़ा पुल, ज्वालापुर में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, इसके पूर्व राष्ट्रगीत वन्दे मातरम के पश्चात ध्वजारोहण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री भारत भूषण विद्यालंकार ने किया। राष्ट्रगान के बाद संगठन के अध्यक्ष देशबन्धु, महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी, अरुण पाठक तथा कैलाश वैष्णव ने महात्मा गॉंधी तथा लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर एवं शहीद जगदीश वत्स की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उपस्थित स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के भाई बहन तथा स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने भावपूर्ण पुष्पांजलियां समर्पित कीं।

स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने उपस्थित स्वजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत वर्ष को स्वतंत्रता दिलाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों का यह देश सदैव ऋणी रहेगा, हम महापुरुषों की जयन्ती पर केवल पुष्प ही न चढ़ाएं बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में धारण कर सकें तो ही जयन्ती मनाना सार्थक होगा। रघुवंशी ने आज देशभर में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के तत्वावधान में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों में शामिल स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के भाई बहनों को सम्बोधित करते हुए अपने संदेश कहा कि गांधी जी के विचारों ने उन्हें समूचे विश्व में प्रतिष्ठित किया है, देश को यदि प्रगति पथ पर आगे बढ़ाना है तो गांधीजी के अहिंसात्मक विचारों को ही आत्मसात करना होगा और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाना होगा। रघुवंशी ने 26 अक्टूबर में अमरकंटक मध्यप्रदेश तथा 2 दिसम्बर को रांची झारखण्ड में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार राष्ट्रीय सम्मेलनों की भी विस्तृत जानकारी दी।

संगठन के अध्यक्ष देशबन्धु ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गांधीजी तथा शास्त्री जी के चित्रों पर दो पुष्प चढ़ा कर औपचारिकता तो हम प्रतिवर्ष पूरी कर लेते हैं, पर गांधी जी से स्वच्छता और शास्त्री जी से सादगी और मितव्ययिता की सीख नहीं ले पाते हैं। हरित ऋषि विजयपाल सिंह बघेल ने श्रद्धांजलि समर्पित करते हुए कहा कि पूरे देश ने महात्मा गांधी की अगुवाई में स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी तथा बड़े से बड़ा बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटे। आज हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों के कारण ही आजादी की हवा में साॅंस ले रहे हैं। दैशिक शास्त्र विशेषज्ञ सुरेश चन्द्र सुयाल ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि यह देश सर्वधर्म समभाव का देश है तथा हम सब को भाईचारे के साथ इस देश में रहना है तथा हमें पुनः इस देश में भाईचारे की भावना को मजबूत करना होगा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री भारत भूषण विद्यालंकार ने अपने बचपन की घटना का उल्लेख करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने ही थे कि हम अपने पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री तुंगल सिंह के साथ उनके दिल्ली स्थित छोटे से मकान में गए, उस समय लाल बहादुर शास्त्री स्नान कर रहे थे, हम जिस कमरे में बैठे थे उसी से लगे हुए बाथरूम से शास्त्री जी स्नान करके तौलिया से शरीर पोंछते हुए निकले और पिताजी से मित्रवत बात करने लगे, उनकी इस सादगी का हमारे ऊपर व्यापक प्रभाव पड़ा। आज हमें उनकी सादगी भरे जीवन से सीख लेने की आवश्यकता है।

प्रार्थना सभा में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों से सर्वश्री अशोक चौहान, यशवंत चौहान, वीरेन्द्र गहलोत, कैलाश चन्द वैष्णव, अनुराग सिंह गौतम, आदित्य गहलोत, शिव कुमार राणा, निर्दोष कुमार, शांतनु, अशोक कुमार आर्य, दिनकर आर्य, दीपेक्ष आर्य, कमलेश चौहान, प्रदीप गौतम, नरेन्द्र कुमार सैनी, नरेन्द्र कुमार वर्मा, कृष्ण गोपाल पंत, सुभाष धींगरा, कर्ण सिंह राणा, शिव कुमार, सत्यवती, ममता धीमान, कन्हैया सिंह, प्रमेश चौधरी, राकेश चौहान, अजय कुमार सरोज सहित स्थानीय गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

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