भारतीय शिक्षण मंडल ने गुरु-शिष्य परंपरा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर दिया जोर

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सतपुली, 10 अगस्त। राजकीय महाविद्यालय सतपुली, पौड़ी गढ़वाल में भारतीय शिक्षण मंडल, उत्तराखंड प्रांत के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ‘व्यास पूजन समारोह-2026’ का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को महर्षि वेदव्यास के जीवन, कृतित्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अतुलनीय योगदान से परिचित कराना रहा।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार ने महर्षि वेदव्यास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा के महान संवाहक थे। उन्होंने विशाल ज्ञान-संपदा को व्यवस्थित एवं जनसुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका साहित्य भारतीय संस्कृति, दर्शन, इतिहास एवं जीवन-मूल्यों का महत्वपूर्ण आधार है।

मुख्य अतिथि एवं भारतीय शिक्षण मंडल के जिला संयोजक डॉ. आशीष उपाध्याय ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। गुरु केवल विषयगत ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि शिष्य के व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन, विवेक एवं चरित्र का निर्माता होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान के साथ संस्कार एवं चरित्र निर्माण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा में निरंतर परिवर्तन के इस दौर में गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और गुरु-शिष्य संबंधों की मूल भावना को पुनः सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर विद्यार्थियों में राष्ट्र एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जा सकती है।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. ममता बेलवाल, रसायन विज्ञान विभाग ने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से अपनी संस्कृति, परंपराओं एवं समृद्ध ज्ञान-विरासत से जुड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भारतीय चिंतन के समावेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा और अपनी गौरवशाली ज्ञान-विरासत के प्रति सम्मान एवं जागरूकता की भावना को और मजबूत किया।

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