धारकोट में भूस्खलन से सड़क मार्ग बार-बार हो रहा बाधित

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डोईवाला विधानसभा के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र धारकोट में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन से सड़क मार्ग बार-बार बाधित हो रहा है।

गुरुवार सुबह भी भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़क पर आने से मार्ग पूरी तरह बंद हो गया, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया।
सूचना मिलने पर लोक निर्माण विभाग, ऋषिकेश द्वारा जेसीबी मशीन मौके पर भेजी गई। मशीन ने सड़क पर पड़े कुछ मलबे को हटाकर अस्थायी रूप से मार्ग खोल दिया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर भारी मात्रा में मलबा और बड़ी-बड़ी चट्टानें लगातार गिर रही थीं, वहां पर्याप्त कार्य किए बिना ही मशीन वापस लौटा दी गई। इसके कुछ ही समय बाद दोबारा भूस्खलन हुआ और सड़क फिर से पूरी तरह बंद हो गई।

स्थानीय निवासी आदर्श राठौर ने लोक निर्माण विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई है। यदि मशीन को तब तक मौके पर रखा जाता, जब तक पूरा मलबा हटाकर सड़क सुरक्षित नहीं हो जाती, तो दोबारा मार्ग बंद होने की नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि यह लापरवाही दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के साथ अन्याय है।
आदर्श राठौर ने कहा कि धारकोट सहित आसपास के गांवों के लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जरूरतें इसी सड़क पर निर्भर हैं। सड़क बंद होने से विद्यार्थी स्कूल और कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं, मरीजों को अस्पताल ले जाने में कठिनाई हो रही है तथा किसानों और स्थानीय लोगों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। यदि किसी गर्भवती महिला, गंभीर मरीज या अन्य आपातकालीन स्थिति में किसी व्यक्ति को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े, तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने के बावजूद संवेदनशील स्थानों पर विभाग द्वारा कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में हर वर्ष भूस्खलन की घटनाएं होती हैं, इसके बावजूद न तो पर्याप्त मशीनें तैनात की जाती हैं और न ही जोखिम वाले स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि विभाग आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
आदर्श राठौर ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि धारकोट मार्ग पर तत्काल जेसीबी मशीन और कर्मचारियों की स्थायी तैनाती की जाए। जब तक मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक मशीन को मौके से न हटाया जाए। साथ ही भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का तकनीकी निरीक्षण कर स्थायी सुरक्षा कार्य किए जाएं, ताकि भविष्य में बार-बार सड़क बंद होने की समस्या से ग्रामीणों को राहत मिल सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से तत्काल सड़क सुचारु कराने, संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्य कराने और बरसात के पूरे मौसम में आवश्यक मशीनरी एवं कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि सड़क ही उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

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