सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज: विद्यार्थियों को संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और महान वीरों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया

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सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेक्टर-2, बीएचईएल रानीपुर, हरिद्वार में आज वंदना सत्र के दौरान क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीमान डोमेश्वर साहू जी का आगमन हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त अन्थवाल जी एवं श्री डोमेश्वर साहू जी ने मां सरस्वती एवं भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर वंदना सत्र में सहभागिता की। वंदना सत्र की समाप्ति के पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त अन्थवाल जी ने श्री डोमेश्वर साहू जी को पटका पहनाकर एवं बैज लगाकर उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए श्री डोमेश्वर साहू जी ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और देश के महान वीरों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता और गौरव की रक्षा के लिए असंख्य वीरों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित किया। उनके त्याग और बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र वातावरण में जीवन जी रहे हैं।

उन्होंने रानी दुर्गावती के अदम्य साहस और स्वाभिमान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मातृभूमि और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए वीरतापूर्वक संघर्ष किया। इसी प्रकार वीर विनायक दामोदर सावरकर के राष्ट्रप्रेम, त्याग और स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष से विद्यार्थियों को प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद की निर्भीकता तथा शहीद भगत सिंह के राष्ट्र के प्रति समर्पण का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का संदेश दिया।

श्री साहू जी ने कहा कि हमारी संस्कृति केवल हमारी पहचान ही नहीं, बल्कि हमारी शक्ति भी है। हमें अपनी महान परंपराओं, देवी-देवताओं, महापुरुषों और राष्ट्र के प्रतीकों का सदैव सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, भारत माता तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना अपने जीवन में विकसित करें और अपने आचरण से देश की गरिमा बढ़ाएं। उन्होंने अनेक प्रेरणादायी उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने तथा देश के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने देशभक्ति, संस्कार एवं भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। श्री डोमेश्वर साहू जी का यह संबोधन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक रहा।

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