श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में NAAC गुणवत्ता मानकों पर कार्यशाला, कुलपति ने गुणवत्ता संस्कृति को अपनाने का किया आह्वान

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ऋषिकेश, 7 अगस्त 2026। श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC), पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश द्वारा आज “Elevating Standards: A Sensitisation Workshop on NAAC Frameworks” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय में गुणवत्ता संस्कृति को सुदृढ़ बनाने तथा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के मानकों एवं प्रक्रियाओं के प्रति प्राध्यापकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से किया गया।

यह कार्यशाला माननीय कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में आयोजित की गई। अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो. महाजन ने कहा कि NAAC केवल मूल्यांकन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्थागत गुणवत्ता, नवाचार, पारदर्शिता एवं सतत सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने सभी NAAC मापदंड संयोजकों व परिसर के समस्त प्राध्यापकों से गुणवत्ता उन्मुख कार्यसंस्कृति को अपनाने तथा विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

मा. कुलपति प्रो. महाजन ने कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय के NAAC के सभी NAAC क्राइटेरिया के संयोजकों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने प्रत्येक क्राइटेरिया से संबंधित कार्यों की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता संवर्धन, प्रभावी दस्तावेज़ीकरण, नवाचार, श्रेष्ठ प्रथाओं के समुचित संकलन तथा साक्ष्य-आधारित कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

उन्होंने सभी संयोजकों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने क्राइटेरिया के अंतर्गत निर्धारित कार्यों को समयबद्ध एवं व्यवस्थित रूप से पूरा करें तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विश्वविद्यालय को आगामी NAAC प्रत्यायन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करें। कुलपति महोदय ने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से विश्वविद्यालय गुणवत्ता के नए मानक स्थापित करेगा।

कार्यक्रम के संयोजक एवं आईक्यूएसी निदेशक प्रो. गुलशन कुमार ढींगरा ने मा. कुलपति महोदय का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता केवल प्रत्यायन प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सतत सुधार की एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि NAAC के फ्रेमवर्क के अनुरूप शिक्षण, शोध, नवाचार, संस्थागत प्रशासन, छात्र-केंद्रित गतिविधियों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के सभी आयामों में गुणवत्तापूर्ण कार्य करना आवश्यक है। अंत में उन्होंने सभी का कार्यशाला की सफलता के लिए आभार व्यक्त व्यक्त किया ।

उक्त कार्यशाला में आईक्यूएसी उप-निदेशक के डॉ. आर के जोशी, विश्वविद्यालय परिसर के प्रो. डी सी गोस्वामी, प्रो. दीपा शर्मा, डॉ. शालिनी रावत, प्रो. दिनेश शर्मा, प्रो. डीकेपी चौधरी, प्रो. धर्मेंद्र तिवारी, प्रो. पूनम पाठक, प्रो. अहमद परवेज, प्रो. पुष्पांजलि आर्य, प्रो. अंजनी कुमार दुबे, डॉ. अटल त्रिपाठी, डॉ सुनीति कुमार कुडियाल, डॉ. सीमा बेनीवाल, डॉ. पुष्कर गौड़, डॉ. अशोक मैंदोला, डॉ. नीतिका, डॉ. गजेन्द्र, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. केदार सिंह, डॉ. पंकज रावत, डॉ अलका, डॉ अर्जुन सिंह, देवेन्द्र भट्ट, चंद्रशेखर आदि उपस्थित रहे।

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