सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज: विज्ञान शिक्षण में एआई के प्रभावी उपयोग पर शिक्षकों ने दी पावर पॉइंट प्रस्तुति

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सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज, सेक्टर-2, बीएचईएल रानीपुर, हरिद्वार में 24वें अखिल भारतीय विज्ञान मेले के अंतर्गत 5 अगस्त को विद्यालय स्तरीय ‌विज्ञान पत्र प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय “विज्ञान शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रभावी एवं उत्तरदायी उपयोग” रहा, जिसमें विद्यालय के 10 विज्ञान शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अपने विचार एवं नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अन्थवाल, चिन्मय डिग्री कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदोष कुमार शर्मा, श्री राम इंस्टिट्यूट, बादशाहपुर की निदेशक डॉ. नीता नागियान, कोर कॉलेज के डॉ. प्रशांत कुमार तथा वैज्ञानिक डॉ. हर्षिता वशिष्ठ द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया गया।

प्रतियोगिता में प्रवीण कुमार, अमित ध्यानी, पूजा, भानु प्रताप, देवेश कुमार, कैलाश भदुला, करुणा गुप्ता, प्रियंका पटवाल, सोनिया तथा नेहा वर्मा ने AI के माध्यम से विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं छात्र-केंद्रित बनाने के विभिन्न आयामों पर अपने शोधपत्र एवं पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन दीपक कुमार ने किया।

निर्णायक मंडल में शामिल डॉ. प्रदोष कुमार शर्मा, डॉ. नीता नागियान, डॉ. प्रशांत कुमार एवं वैज्ञानिक डॉ. हर्षिता वशिष्ठ ने सभी प्रस्तुतियों का गंभीरता एवं निष्पक्षता के साथ मूल्यांकन किया।

इस अवसर पर डॉ. प्रदोष कुमार शर्मा ने कहा कि “कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है, किंतु इसका उपयोग शिक्षक के मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ ही होना चाहिए।” डॉ. नीता नागियान ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “एआई विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है, लेकिन मौलिक चिंतन, रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों का स्थान कभी नहीं ले सकता।”

डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि “तकनीक तभी सार्थक है जब उसका उपयोग विद्यार्थियों में जिज्ञासा, अनुसंधान और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए किया जाए। शिक्षकों को एआई का प्रयोग एक सहायक उपकरण के रूप में करना चाहिए, न कि उसका पूर्ण विकल्प मानना चाहिए।”

डॉ. हर्षिता वशिष्ठ ने कहा कि “एआई का उपयोग वैज्ञानिक तथ्यों की समझ, प्रयोगों के विश्लेषण तथा शोध गतिविधियों को गति देने में अत्यंत उपयोगी है, परंतु इसकी विश्वसनीयता की सतत जांच आवश्यक है। विज्ञान शिक्षा में तकनीक के साथ नैतिकता और जिम्मेदारी का समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”

अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अन्थवाल ने सभी निर्णायकों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया तथा उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध अभिरुचि एवं नवाचार क्षमता को विकसित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत सिद्ध होते हैं।

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