हरिद्वार। यात्रा सीजन और आगामी अर्धकुंभ मेले की तैयारियों के बीच धर्मनगरी हरिद्वार के अपर रोड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर नगर निगम और व्यापारियों के बीच जमकर विवाद हो गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, नारेबाजी हुई और देखते ही देखते क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई। घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि तीर्थनगरी की छवि और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
अतिक्रमण हटाने पहुंची निगम टीम, व्यापारियों ने जताया विरोध
जानकारी के अनुसार नगर निगम की टीम अपर रोड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने और मार्ग को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पहुंची थी। अधिकारियों ने व्यापारियों से अनुरोध किया कि वे अपनी दुकानों का सामान नालों के पीछे निर्धारित सीमा के भीतर रखें, ताकि यात्रियों और श्रद्धालुओं के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
नगर निगम का कहना था कि आगामी अर्धकुंभ और बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखना आवश्यक है। हालांकि कई व्यापारियों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए सामान हटाने से इंकार कर दिया, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया।
अधिकारियों का घेराव, लगे “नगर निगम मुर्दाबाद” के नारे
विरोध कर रहे व्यापारियों ने नगर निगम अधिकारियों का घेराव कर लिया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “नगर निगम मुर्दाबाद” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। अधिकारियों ने व्यापारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। विवाद बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोग और राहगीर भी मौके पर एकत्र होने लगे, जिससे कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गंदगी फैलाने के आरोप से और भड़का मामला
विवाद के दौरान स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब नगर निगम कर्मचारियों पर सड़क और दुकानों के सामने गंदगी डालने के आरोप लगे। गंदगी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को विवादित क्षेत्र में खाली कर दिया गया, जिससे सड़क पर कूड़े और गंदगी का ढेर लग गया। कुछ ही देर में वह मार्ग, जहां से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गुजरते हैं, गंदगी से पट गया। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने भी नाराजगी जताई ।
हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ मेले की तैयारियां चल रही हैं और प्रशासन लगातार व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रहा है। ऐसे समय में नगर निगम और व्यापारियों के बीच हुआ यह टकराव प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करता नजर आया।
धर्मनगरी में घटी इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अर्धकुंभ जैसे विशाल आयोजन से पहले प्रशासन, नगर निगम और व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो पाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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