वर्तमान समय में शोध कार्यों को बहुविषयी दृष्टिकोण से करना अत्यंत आवश्यक-डॉ. गौरव वार्ष्णेय

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हरिद्वार जनपद स्थित धनौरी पी.जी. कॉलेज, धनौरी में गणित विभाग द्वारा आयोजित “उत्तराखंड के सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति” विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिवस के तृतीय सत्र का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) विजय कुमार द्वारा किया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. गिरीश शर्मा (एमसीए विभाग, भाई परमानंद इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज) तथा विशिष्ट वक्ता डॉ. गौरव वार्ष्णेय (एसोसिएट प्रोफेसर, गणित विभाग, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय) को स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही संगोष्ठी में डॉ. सूरज पाल सिंह (सहायक आचार्य, गणित विभाग, राजकीय डिग्री कॉलेज, बाजपुर) को भी डॉ. राहुल कुमार एवं डॉ. आनंद शर्मा द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्य वक्ता प्रो. गिरीश शर्मा ने “Role of Mathematics in Achieving Sustainable Development Goals” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान समय में गणित डेटा माइनिंग एवं विश्लेषण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में प्रस्तुत किए गए थे।

विशिष्ट वक्ता डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने “रोगग्रस्त धमनियों में रक्त प्रवाह और दवा वितरण के लिए गणितीय मॉडलिंग ढांचा: चिकित्सीय अनुप्रयोग” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि वर्तमान समय में शोध कार्यों को बहुविषयी (Multidisciplinary) दृष्टिकोण से करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गणितीय प्रतिरूपण (Mathematical Modeling) के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए बताया कि किसी भी मॉडल का निर्माण “क्यों, क्या प्राप्त हुआ, क्या दिया गया, धारणा (Assumptions) एवं कैसे” जैसे प्रमुख आधारों पर किया जाता है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा पंत एवं डॉ. कृष्णन बिष्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम के अंत में संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अंकुर कुमार द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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