सती मोह और पार्वती-शिव विवाह का प्रसंग सबसे गहरा आध्यात्मिक अर्थ रखता है-आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज

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सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल रानीपुर हरिद्वार प्रांगण में लगातार चली आ रही 57 वीं श्री राम जानकी कथा के द्वितीय दिवस की कथा मे परम पूज्य आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज जी ने श्रोता गणो को माता सती का प्रसंग और भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा विस्तारपूर्वक सुनाई।

कथा व्यास जी ने बताया की सती मोह और पार्वती-शिव विवाह का प्रसंग सबसे गहरा आध्यात्मिक अर्थ रखता है।व्यास जी ने कहा की कथा की शुरुआत तब होती है जब त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ ऋषि अगस्त्य के पास राम कथा सुनने कौआज। वहां सती के मन में शंका उत्पन्न होती है कि जो राम अपनी पत्नी (सीता) के वियोग में रो रहे हैं, वे साक्षात ब्रह्म कैसे हो सकते हैं?​सती माता सीता का रूप धारण कर श्री राम की परीक्षा लेने जाती हैं।लेकिन ​श्री राम जी उन्हें पहचान लेते हैं।जब शिव जी को यह ज्ञात होता है कि सती ने सीता का रूप लिया, तो वे मानसिक रूप से सती का त्याग कर देते हैं।​सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में बिना बुलाए जाती हैं, जहाँ शिव जी का अपमान देखकर वे योगाग्नि में अपना शरीर त्याग देती हैं।

यही सती अगले जन्म में हिमाचल राज के घर पार्वती (शैलपुत्री) के रूप में जन्म लेती हैं।​देवर्षि नारद पार्वती जी को बताते हैं कि उनके हाथ की रेखाओं के अनुसार उनका विवाह शिव जी से ही होगा, लेकिन इसके लिए उन्हें कठिन तपस्या करनी होगी।​पार्वती जी हजारों वर्षों तक निराहार रहकर तपस्या करती हैं, जिससे उनका नाम ‘अपर्णा’पड़ता है।​भगवान शिव उनकी परीक्षा लेने के लिए सप्तऋषियों को भेजते हैं, लेकिन पार्वती जी अपने निश्चय पर अडिग रहती हैं।​जब देवता शिव जी को समाधि से जगाने के लिए कामदेव को भेजते हैं, तो शिव जी अपना तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर देते है। कथा व्यास जी बताते है की यह प्रसंग हमे यह सिखाता है कि भक्ति में वासना का कोई स्थान नहीं होता है।​अंत में, शिव जी ने देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हुए माता पार्वती से विवाह के लिए तैयार हो जाते है।शिव पार्वती के कता सुनते हुए कथा व्यास जी ने कथा सुनाते हुए कहा कि शंकर जी शमशान की राख से सिंगार करते है क्योंकि यह सिंगार ऐसा है जो हमेशा सत्य व अमृत के समान रहता है लेकिन सांसारिक द्रव्य एक दिन बाद ही मिट जाता है अतः कथा कहती है कि संसार में आकर व्यक्ति अच्छा आचरण कर के परलोक मै प्रसिद्धि प्राप्त कर सकता है।भगवान शंकर और पार्वती का विवाह का उत्सव बड़ी धूम-धाम के साथ शिव मंदिर सेक्टर 1 प्रांगण मे मनाया गया है।
कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.पी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायणत्रिपाठी,तेजप्रकाश,अनिल चौहान,मानदाता,राकेश मालवीय, रामकुमार,मोहित तिवारी,आदित्य गहलोत,ऋषि,सुनील चौहान, होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद दिनेश उपाध्याय,रामललित गुप्ता अलका शर्मा,संतोष चौहान, अनपूर्णा,सुमन,विभा गौतम, मंजू ,बृजेलेश,दीपिका,कौशल्या,
सरला शर्मा,राजकिशोरी मिश्रा और अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।

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