हर्ष विद्या मंदिर पीजी कॉलेज के चित्रकला विभाग द्वारा छात्र-छात्राओं को कराया गया शैक्षिक भ्रमण

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हरिद्वार, लक्सर। हर्ष विद्या मंदिर (पी.जी) कॉलेज रायसी के चित्रकला विभाग द्वारा एक एजुकेशनल टूर मेरठ स्थित सरधना कैथोलिक चर्च में ले जाया गया, जहां पर छात्र और छात्राओं ने इटली से आई रोमन शैली में निर्मित मूर्तियों का अवलोकन किया। उनके बारे में गहनता से पढ़ा ।

चर्च की डीप नॉलेज “फादर मार्टिन रावत” के द्वारा दी गई । यह पर हमें रोमन शैली की भव्यता और विशालता के दर्शन हुए साथ ही रोमन सभ्यता में वास्तुकला मैं इमारत को बहुत मजबूत एवं अर्धवृत्त आकार मेहराबों और गुंबदों के रूप में प्रदर्शित किया जाता है जिसका प्रभाव पूर्ण रूप से चर्च में देखने को मिला।
चर्च में स्थापित रोम से लाई गई मूर्तियां यथार्थवाद के वास्तविकता को दर्शा रही थी, उनके भाव इस रूप में छात्रों को देखने को मिले जिन्हें देखकर छात्र उस समय की कला को प्रत्यक्ष रूप से देख सके रोमन वास्तुकला और मूर्ति कला केवल सुंदरता के लिए नहीं बल्कि उपयोगिता के लिए भी बहुत प्रसिद्ध रही है।

छात्र छात्राओं ने चर्च में जाकर देखा कि किस प्रकार से संगमरमर की मूर्तियों को तराशा गया है, मूर्तियों की जीवटता देखते ही बन रही थी। ऐसा लग रहा था कि अगर कपड़े ने मोड़ भी लिया है तो वो भी पत्थर से लिया है जिससे वो सच में ही कपड़ा पहना हुआ है ऐसा प्रतीत हो रहा था । इस ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध चर्च के आर्किटेक्चर मूर्तियों का निर्माण उस समय की जो उनके वस्त्र थे, उन सबके बारे में गहनता से छात्र छात्राओं ने अध्ययन किया।

यह चर्च बेगम समरू द्वारा बनाया गया था, कहा जाता है कि एक बार वो युद्ध के मैदान में जा रही थीं और उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी ने उनसे पूछा कि आप कहां जा रही हो और उन्होंने कहा कि मैं युद्ध के लिए जा रही हूं कि तुम युद्ध में सफल हो जाओगी। अगर वास्तव में युद्ध में सफल हो गई तो मैं चर्च बनवाऊंगी। चर्च के नाम पर जमीन दे दूंगी और उन्होंने इतना बड़ा एरिया, वो चर्च के नाम पर दे दिया बेगम समरू के पति एक क्रिश्चियन थे ।बहुत सुंदर उन्होंने चर्च बनवाया जिसमें जो मूर्तियाँ हैं उनको इटली में निर्मित करवाकर लाया गया और तब उनको यहां पर स्थापित किया गया।

सारी मूर्तियाँ रोमन शैली में निर्मित हैं। उसके बाद छात्र छात्राएं मेरठ स्थित औघड़ नाथ मंदिर भी गए जहां पर उन्होंने उस मंदिर की नक्काशी और भव्यता को देखकर यह जाना कि कला के क्षेत्र में कितना विकास हो चुका है, जबकि पहले हम अपने मंदिरों को देखते हैं या अपने इस तरह के स्थलों को भी देखते हैं जो भी आर्टिटेक्ट के लिए प्रसिद्ध है। छात्र वहां की नक्काशी को देखकर वह बहुत प्रभावित हुए जो पत्थर पर उकेरी गई थी, उनकी भव्यता को देखकर उन सभी को बहुत अच्छा लगा और सभी ने अपने नोट्स तैयार करें वहीं बैठकर। इस कार्यक्रम की संयोजक थी डॉ वर्षारानी, डॉ॰ प्रिया प्रधान। डॉ शिल्पी, डॉ निधि ने पूर्ण से सहयोग दिया। यह टूर 35 छात्र छात्राओं को लेकर वहां गया था।

सभी छात्रों ने टूर के साथ बहुत एन्जॉय भी किया। शिक्षा के साथ एंजॉय भी जरूरी होता है। टूर का उद्घाटन महाविद्यालय के प्रबंधक महोदय डॉक्टर के पी सिंह जी , डॉक्टर प्रभावती जी, डॉक्टर हर्ष कुमार दौलत जी ने हरी झंडी दिखाकर किया। सभी छात्र छात्राओं से उन्होंने कहा कि आप सभी बहुत अच्छे टूर पर जा रहे हैं तो आप सभी वहां से सीखर आएं और देखें वहां पर कि कितनी सुंदर भव्यता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य महोदय ने कहा कि आप सभी जो इतनी दूर जाकर गहनता के साथ सीखेंगे, उसे अपने मस्तिष्क में भी रखें। मेमोरी में भी रखें। फोटोग्राफ्स भी लें और अपनी डायरी पर नोट भी करते रहें ताकि भविष्य में आपके यह काम आए आज कला के क्षेत्र में सबसे अधिक भविष्य की संभावनाए हैं । कला विषय आज विश्व पटल पर अपना स्थापत्य बनाए हुए है।
श्री गजेन्द्र सिंह और श्री बाबूराम जी का भी सभी छात्र छात्राओं के साथ सहयोग रहा। सभी ने टूर का आनंद लिया और इस प्रकार चित्रकला विभाग द्वारा ले जाया गया ये टूर बहुत सक्सेस रहा सभी ने विभाग को बहुत बहुत बधाई दी

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