हरिद्वार- धर्मनगरी हरिद्वार स्थित घाटों पर रविवार को एक विशेष पदयात्रा के पहुंचने के साथ ही धार्मिक और सामाजिक चर्चा का माहौल बन गया। इस पदयात्रा में शामिल कुछ लोगों ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने की सार्वजनिक घोषणा की।
जानकारी के अनुसार, यह पदयात्रा 11 अप्रैल को बिजनौर जिले के गंगापुर बैराज से शुरू हुई थी और दो दिनों की यात्रा के बाद 12 अप्रैल को हरिद्वार पहुंची।
यात्रा में शामिल लोगों ने प्रसिद्ध हर की पैड़ी पर गंगा स्नान किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हिंदू धर्म अपनाने की बात कही। पदयात्रा के दौरान प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क रहा। अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
पदयात्रा में शामिल इमरोज आलम, जिन्होंने स्वयं को पूर्व मुस्लिम बताया, ने कहा कि यह यात्रा उन लोगों के अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकाली गई है, जो धर्म परिवर्तन या धर्म छोड़ने जैसे विषयों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को अपनी आस्था और विचार चुनने का अधिकार है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि समाज में कट्टरता और अतिवाद समाप्त होना चाहिए।
वहीं कुलदीप विद्यार्थी ने बताया कि इस पदयात्रा का उद्देश्य ऐसे लोगों को मंच प्रदान करना है, जो अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की विशेषता इसकी उदारता और लचीलापन है, जिससे लोग सहज रूप से इसे अपनाते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का धर्म और विचारधारा चुनने की स्वतंत्रता प्राप्त है। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

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