“विजन फॉर विकसित भारत@2047” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ

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नरेन्द्रनगर, यहाँ स्थित धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय में “विजन फॉर विकसित भारत@2047” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ।

उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवा, कौशल, उद्यमिता, संस्कृति, शिक्षा-स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट लक्ष्य तय करना आवश्यक है। उन्होंने समरसता की संस्कृति को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
मुख्य वक्ता के रूप में फोर्ट वैली स्टेट यूनिवर्सिटी (यूएसए) के प्रो. निर्मल जोशी ने पावलाउनिया वृक्ष के आर्थिक, औषधीय और औद्योगिक महत्व को रेखांकित किया।

गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने स्वास्थ्य सूचकांकों व मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने की जरूरत बताई। स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति प्रो. जी. एस. रजवार ने सतत विकास व पर्यावरण संतुलन आधारित योजनाओं की वकालत की।
दून विश्वविद्यालय के प्रो. एच. सी. पुरोहित ने गरीब, महिला, युवा व किसानों के साथ गैर-परंपरागत ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य को आवश्यक बताया।

काशीपुर पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सुमिता श्रीवास्तव ने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा बताया। एनएनएसएस समालखा ग्रुप के प्रो. राजेश गोयल ने बहुध्रुवीय विश्व में भारत को अपने विकास सूचकांक बनाने की जरूरत बताई। पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक एन. पी. माहेश्वरी ने परिवहन लागत कम करने पर जोर दिया, जबकि चंडीगढ़ के प्रो. मुकेश तिवारी ने मानव संसाधन के बेहतर उपयोग को महत्वपूर्ण बताया।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की प्रो. सुरेखा राणा ने वैल्यू एजुकेशन और मानवीय संवेदनाओं को विकास का आधार बताया। जेएनयू की शोधार्थी विशाल ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।
प्राचार्य प्रो. प्रणिता नंद ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। इस अवसर पर स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम संयोजक रहे डॉ. संजय कुमार ने कहा, यह संगोष्ठी केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि विकसित भारत@2047 के ठोस रोडमैप की दिशा में एक सामूहिक बौद्धिक पहल है, जिसमें नीति, शोध और समाज—तीनों को जोड़ने का प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम का संचालन पर्यटन अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय मेहर ने किया तथा अतिथियों का सम्मान स्मृति चिन्ह व पौधों से किया गया।

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