हरिद्वार। विश्व हिन्दू परिषद, उत्तराखण्ड के प्रांत अध्यक्ष श्री रविदेव आनंद ने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन तथा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने के निर्णय का स्वागत करते हुए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
रविदेव आनंद ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्राधिकरण का गठन एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है। यह निर्णय राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक न्याय, समान अवसर और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखण्ड में अब शिक्षा का आधार राष्ट्रीय पाठ्यक्रम, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और समान नागरिक अवसर होंगे। शिक्षा किसी भी समाज के भविष्य की नींव होती है। जब सभी समुदायों के बच्चे एक समान राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पढ़ेंगे तो उन्हें आधुनिक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे अल्पसंख्यक समाज के बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित होगा और वे देश के विकास में सक्रिय भागीदार बनेंगे।
रविदेव आनंद ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में विभिन्न शिक्षाविदों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सम्मिलित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने हेतु गंभीर है। उत्तराखण्ड सरकार का यह कदम किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं वरन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के पक्ष में है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परंपरागत सीमाओं में बंधना नहीं अपितु विद्यार्थियों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ना है।
विश्व हिन्दू परिषद, उत्तराखण्ड सरकार के इस निर्णय को सामाजिक समरसता, समान शिक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत पहल मानती है। रविदेव आनंद ने कहा कि हम मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं उत्तराखण्ड सरकार को इस साहसिक एवं राष्ट्रहितकारी निर्णय के लिए धन्यवाद देते हैं। यह निर्णय उत्तराखण्ड को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा देगा और समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करेगा।

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