यूकोस्ट देहरादून द्वारा प्रायोजित आईपीआर व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन

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यूकोस्ट देहरादून द्वारा प्रायोजित आईपीआर व्याख्यान श्रृंखला का सातवां सत्र, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मालदेवता (रायपुर, देहरादून) के आईपीआर प्रकोष्ठ द्वारा हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. यतीश वशिष्ठ एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एम. एस. पंवार ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उद्घाटन वक्तव्य डॉ. अनीता चौहान द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार के महत्व और वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता का परिचय डॉ. लीना रावत द्वारा प्रस्तुत किया गया।
मुख्य व्याख्यान “ब्लूप्रिंट ऑफ़ इनोवेशन : स्ट्रेटेजीज फॉर इफ़ेक्टिव सर्चिंग, अनलॉकिंग नॉलेज एंड प्रॉटेक्टिंग आईडियाज़ ” विषय पर डॉ. उषा पुरोहित, रिसर्च ऑफिसर, डीपी आईआईटी – आईपीआर चेयर, प्रबंधन अध्ययन विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ( आई ॰आई टी ) रुड़की द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में नवाचार की प्रक्रिया में पेटेंट सर्च की महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि प्रभावी पेटेंट सर्च शोधकर्ताओं को पूर्व शोध की जानकारी देती है, दोहराव से बचाती है, शोध के नए अवसरों की पहचान कराती है तथा समय और संसाधनों की बचत करती है।
डॉ. पुरोहित ने पेटेंट क्लासिफिकेशन सर्च, फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड साइटेशन, कीवर्ड एनालिसिस, हाइब्रिड सर्च और बिब्लियोग्राफिकल सर्च की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने गुगल पेटेंट्स साईट के माध्यम से लाइव डेमो प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से पेटेंट खोज की प्रक्रिया समझाई। साथ ही पेटेंट सर्च के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों तथा उनके समाधान पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. कविता काला ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार साझा करते हुए कहा कि युवाओं में आईपीआर के प्रति जागरूकता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सह-संयोजक डॉ. डिंपल भट्ट ने वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में आईपीआर की प्रासंगिकता पर बल देते हुए बताया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में तकनीकी सहयोग डॉ. सुमन गुसाईं एवं डॉ. विनोद शाह द्वारा प्रदान किया गया। ऑफलाइन प्रतिभागियों के पंजीकरण का कार्य डॉ. श्रुति चौकियाल द्वारा संपन्न किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उमा पपनोई द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने मुख्य वक्ता, अध्यक्षगण, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

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