नूरपुर पंजनहेड़ी गोलीकांड में अभिषेक और गौरव की अग्रिम जमानत खारिज

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हरिद्वार। नूरपुर पंजनहेड़ी गोलीकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने आरोपी अभिषेक चौहान और गौरव चौहान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और आवेदकों की घटनास्थल पर मौजूदगी तथा मामले की परिस्थितियां अग्रिम जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं। मामला थाना कनखल में दर्ज एफआईआर संख्या 31/2026 से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 249, 109 और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार 28 जनवरी 2026 को उषा टाउनशिप, ग्राम नूरपुर में सीमांकन के दौरान आरोपी अतुल चौहान, तरुण चौहान, अभिषेक चौहान, गौरव चौहान तथा अन्य लोग कार और स्कूटी से पहुंचे। आरोप है कि सह-आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से गोलीबारी की, जिसमें सचिन चौहान के पेट में तथा कृष्णपाल चौहान के दाहिने हाथ में गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों को उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया था।

आवेदकों के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि मुख्य आरोप अतुल चौहान और तरुण चौहान पर हैं और आवेदकों की भूमिका केवल घटनास्थल पर मौजूद रहने तक सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि घटना भूमि विवाद और ग्राम सभा की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर हुई शत्रुता का परिणाम है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि सह-आरोपी अतुल चौहान ने आत्मरक्षा में अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाई और बाद में स्वयं पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

इसके विपरीत, राज्य पक्ष और शिकायतकर्ता के अधिवक्ताओं ने अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आवेदकों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और वे घटना के समय अन्य सह-आरोपियों के साथ मौजूद थे। अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि आवेदक जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए हैं। साथ ही, अभिषेक चौहान के खिलाफ पूर्व में भी आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी अदालत को दी गई।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और चिकित्सा रिपोर्ट से स्पष्ट है कि घायल व्यक्तियों को शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर गोली लगी थी, जिससे अपराध की गंभीरता सिद्ध होती है। न्यायालय ने यह भी माना कि आवेदक बिना किसी वैध कारण के घटनास्थल पर पहुंचे थे और यह प्रतीत होता है कि वे पूर्व नियोजित मंशा के साथ अन्य सह-आरोपियों के साथ वहां मौजूद थे। इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ सह-आरोपी अभी फरार हैं और आवेदक भी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने माना कि यह मामला अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं है।

उक्त आधारों पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने अभिषेक चौहान और गौरव चौहान की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के इस निर्णय के बाद अब पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की जांच की कार्रवाई तेज करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।राज्य की ओर से डीजीसी (क्रिमिनल) और शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और धारा 109 BNS के अंतर्गत आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। अभियुक्त विवेचना में सहयोग नहीं कर रहे तथा उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। अभियोजन ने यह भी बताया कि अभिषेक चौहान के विरुद्ध पूर्व में भी आपराधिक मुकदमा दर्ज है।

मातृ सदन को लेकर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सह-अभियुक्त ब्रह्मचारी सुधानंद एवं मातृ सदन से जुड़े व्यक्तियों द्वारा उच्च न्यायालय और प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध इस प्रकार की शिकायतें न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने का प्रयास प्रतीत होती हैं और ऐसी गतिविधियां न्यायपालिका को उसके कर्तव्यों से विचलित नहीं कर सकतीं।

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